खुदरा महंगाई
खाद्य वस्तुओं में GST कटौती और आधार प्रभाव से दोनों ग्रामीण व शहरी इलाकों में महंगाई पर भारी असर
अक्टूबर 2025 में भारत की खुदरा महंगाई 0.25% रह गई, जो मौजूदा CPI आधार के तहत अब तक का सबसे निचला स्तर है।
इस गिरावट के पीछे मूल रूप से खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भारी कमी आई है। GST (वस्तु एवं सेवा कर) में कटौती के साथ-साथ पिछले साल के समान अवधि में कीमतों के उच्च आधार ने इस कमी को और तेज़ कर दिया। खाद्य समूहों जैसे सब्ज़ियों, खाने के तेल और अनाज की कीमतों में कमी ने पूरे देश के कीमत स्तर को नीचे खींचा है।
खाद्य वस्तुओं में भारी कमी क्यों?
GST में कटौती से सीधे खाद्य पदार्थों की कीमतों में राहत मिली है, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव कम हुआ है। इसके अलावा, मौसमी सब्ज़ियों और फसलों की अच्छी पैदावार ने बाजार में सप्लाई बढ़ाई, जिससे दाम गिरने में मदद मिली। पिछले साल के तुलना में इस बार मौसम बेहतर था, जिससे आयातित तेल और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतें स्थिर रहीं या घटीं।
गांव और शहर दोनों में कमी क्यों दिखी?
ग्रामीण और शहरी इलाकों में महंगाई दोनों जगह गिरावट का सामना कर रहे हैं, इसका कारण सप्लाई चैन की मजबूती और बेहतर वितरण नेटवर्क है। खासकर, ग्रामीण इलाकों में खाद्य वस्तुओं का आधार असर और कृषि उत्पादन में सुधार महंगाई को कम करने में सहायक रहे हैं। साथ ही, शहरी बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य निर्धारण और उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता ने कीमतों को स्थिर रखा है।
तो इस निचली महंगाई का असर क्या होगा?
घटती महंगाई से उपभोक्ताओं का खर्च करने का आत्मविश्वास बढ़ेगा और घरेलू क्रय शक्ति मजबूत होगी, जो आर्थिक विकास के लिए सकारात्मक संकेत है। खाने-पीने की बुनियादी चीजों के सस्ते होने से परिवारों के बजट में राहत मिलेगी, जिससे अन्य आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ेगी।
हालांकि, बहुत कम महंगाई सूचक भी अर्थव्यवस्था के धीमे विकास या मांग में कमजोरी का संकेत दे सकता है, इसलिए नीति निर्माता इस स्थिति को संतुलित देखने के मूड में हैं। RBI की मौद्रिक नीति में महंगाई के स्थिर रूप से कम रहने पर ब्याज दरों में नरमी या स्थिरता की संभावना बनी रहेगी।
आगे की राह और सावधानियां
महंगाई के इस निचले स्तर का लाभ उठाने के लिए उपभोक्ताओं को संतुलित ख़र्च करने की सलाह दी जाती है। घरेलू बचत और निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य के लिए सुरक्षा बन सके। साथ ही, सरकार और नीति निर्माता सावधानीपूर्वक बाजार के अन्य संकेतकों पर नजर रखेंगे ताकि कीमतों में स्थिरता बनी रहे।
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में स्थायित्व बनाए रखने के लिए सप्लाई चैन सुधार और कृषि क्षेत्र में उन्नत तकनीकों को अपनाना ज़रूरी होगा, ताकि भविष्य में कीमतों में अनियंत्रित उतार-चढ़ाव से बचा जा सके।