वैश्विक आर्थिक माहौल में बढ़ती अनिश्चितताओं के कारण gold prices ने इस सप्ताह बढ़त दिखाई है। खासतौर पर, फिस्कल (आर्थिक) मामलों की चिंता और अमेरिका की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता निवेशकों के बीच सोने की मांग को बढ़ा रही है। निवेशकों ने इसे सुरक्षित निवेश (safe haven) के तौर पर देखा है क्योंकि वे मौजूदा बाजार अस्थिरता से बचाव करना चाहते हैं।
हाल ही में जापानी सरकार के लंबी अवधि वाले बॉंड यील्ड में स्पाइक ने भी सोने की मांग को सही दिशा दी है। जैसे-जैसे सरकारों का कर्ज बढ़ता है, निवेशकों को मुद्रास्फीति और मुद्रा अवमूल्यन का खतरा महसूस होता है, और यह परिप्रेक्ष्य सोने को स्थिर और मूल्यवान संपत्ति बनाता है।
शुक्रवार, दिसंबर 2025 के MCX पर 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1,23,377 प्रति 10 ग्राम के करीब बंद हुई, जो कि पिछले कुछ दिनों की तुलना में स्थिर है। हालांकि, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम होने के संकेत ने सोने के मूल्य पर दबाव डाला है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह अस्थिरता आगामी Fed की बैठक और US रोजगार रिपोर्ट पर निर्भर करेगी, जो निवेशकों को आगे की दिशानिर्देश प्रदान करेगी। अगर फेड के निर्णय में राहत भरा संकेत मिला, तो सोने की कीमतों में फिर से तेजी आ सकती है।
निवेशक और गोल्ड बायर्स के लिए, यह समय सतर्क रहने का है। हालांकि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव होते रहे हैं, लेकिन यह अब भी कई निवेशकों के लिए जोखिम कम करने वाला और पोर्टफोलियो को संतुलित करने वाला विकल्प बना हुआ है।
भारत में अगस्त से अक्टूबर तिमाही में सेंट्रल बैंक के खरीद में भी इजाफा देखा गया है, जो कि सोने की कीमतों का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। इसके अलावा, शादी और धार्मिक मांग से भी घरेलू बाजार में सोने की खरीद बनी हुई है।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं जैसे कि चीन-जापान तनाव, कमजोर आर्थिक डेटा, और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति के फैसले सोने के भाव को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतें इस अनिश्चितता के बीच एक रेंज में बनी रहेंगी, और निवेशकों को खरीदारी के लिए सावधानीपूर्वक समय चुनना चाहिए।
अंततः, सोना निवेश के लिए हमेशा एक सुरक्षित विकल्प रहा है, खासकर तब जब बाजार में मुद्रास्फीति की आशंका और फिस्कल नीति का भविष्य अनिश्चित हो। इस विषय पर अधिक जानकारी और ताजा अपडेट के लिए Market100x को फॉलो करते रहें।